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शनिवार, 22 फ़रवरी 2025

सरमेरा के सीएचसी प्रभारी पर एएनएम ने लगाया शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप

सरमेरा के सीएचसी प्रभारी पर एएनएम ने लगाया शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का आरोप आवेदन देने के डेढ़ माह बाद भी नहीं हुई कार्रवाई 2009 के तत्कालीन प्रभारी चढ़ चुके हैं निगरानी के हत्थे
सरमेरा (नालंदा) विपिन कुमार। सीनियर डॉक्टर के होते हुए जूनियर डॉक्टर सरमेरा स्थित सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर तैनात हैं. यह आरोप स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ अजीत कुमार पर उनके ही कर्मियों ने लगाया है. एएनएम एवं अन्य कर्मियों सहित कुल 39 लोगों ने सामूहिक आवेदन देकर डीएम शशांक शुभंकर से कार्रवाई की मांग की है. कहा है कि प्रभारी के तुगलकी फरमान के कारण अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ईसुआ की वरिष्ठ एएनएम चंपा देवी ने बीमार अवस्था में विगत जनवरी माह में ड्यूटी के दौरान अपना दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद सभी कर्मियों द्वारा शोकसभा के बाद प्रभारी व कर्मियों के बीच सामंजस स्थापित करने को लेकर बुलाई गयी बैठक में प्रभारी ने ना तो भाग लिया. ना ही कर्मियों का मांग पत्र स्वीकार किया. इसके अलावा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर तैनात डॉ अजीत कुमार किसी स्वास्थ्य कर्मियों की ना तो समस्या सुनते हैं, ना ही लिखित शिकायत का समाधान कर पाते हैं. आपात स्थिति में भी व्हाट्सएप, ईमेल तथा डाक के माध्यम से छुट्टी का आवेदन देने पर कर्मियों का अवकाश अस्वीकृत कर देते हैं. कर्मियों के विषम परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए उन पर कर्तव्यहीनता का आरोप लगाकर बिना जांच के सेवा पुस्तिका में दर्ज कर देते हैं. महज 20 मिनट लेट पहुंचने पर कर्मियों से स्पष्टीकरण जारी कर वेतन बंद कर देते हैं. जबकि डॉक्टर अजीत स्वयं प्रत्येक दिन कभी ग्यारह तो कभी बारह बजे अस्पताल पहुंचते हैं. ओपीडी में पहुंचने वाले रोगियों का इलाज खुद करने के बजाय आयुष चिकित्सक से करवाते हैं. इनकी दबंगता एवं मनमानी इस कदर है कि सीएचसी में कार्यरत महिला दंत चिकित्सक को घंटों अपने कक्ष में बिठाकर गप्पे लड़ाते रहते हैं. जिसका प्रमाण सीसीटीवी कैमरे में मौजूद है. जिसके कारण कोई भी कर्मी सीधे प्रभारी से अपनी व्यक्तिगत बातें कर पाने में असहज महसूस करते हैं. डॉ अजीत पर खुद को राजनीतिक रसूखदार का करीबी बताते हुए अपनी दबंगता एवं उदन्डता के बल पर स्वास्थ्यकर्मियों का आर्थिक मानसिक एवं शारीरिक शोषण कर रिश्वत लेने का आरोप कर्मियों ने लगाया है. इन तमाम गंभीर आरोपों के बीच कहा गया है कि पूर्व में भी प्रभारी रह चुके डॉ मनोज कुमार एवं सुजीत कुमार अकेला जैसे सीनियर डॉ के रहते अपने पैसे एवं ऊंची रसूख के बल पर अनुभवहीन होते हुए भी डॉक्टर अजीत कुमार प्रभारी बने हुए हैं. वर्तमान प्रभारी को पद से हटकर लगाए गए आरोपों के निष्पक्ष जांच की मांग की गई है. शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आवेदन देने के डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी ना तो जांच हुई. ना ही कार्रवाई की गई है. जिसके कारण पीड़ितों में आक्रोश व्याप्त है. बताया जाता है कि वर्ष 2009 में तत्कालीन एएनएम रामकली देवी की शिकायत पर इसी प्रकार से स्वास्थ्य कर्मियों को पीड़ित करने वाले प्रभारी डॉ विजय कुमार को निगरानी की टीम ने रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ा था. " सारे आरोप बेबुनियाद एवं मनगढ़ंत हैं. ईर्ष्या, दुर्भावना एवं राजनीति से प्रेरित हैं." डॉ अजीत कुमार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सीएचसी सरमेरा नालंदा

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