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शुक्रवार, 18 नवंबर 2022

Skp7news नवादा : वारिसलीगंज चीनी मिल बचाने को लेकर सर्वदलीय बैठक, तय हुई आंदोलन की रूप रेखा

Skp7news नवादा : वारिसलीगंज चीनी मिल बचाने को लेकर सर्वदलीय बैठक, तय हुई आंदोलन की रूप रेखा
नवादा(सुरेश राय)। 30 वर्षों से बंद वारिसलीगंज चीनी मिल की जगह पुनः अत्याधुनिक चीनी मिल लगवाने की मांग को लेकर शुक्रवार को जिले के वारिसलीगंज जिला परिषद डाक बंगला परिसर में बैठक आयोजित कर कई निर्णय लिया गया। बैठक में बड़ी संख्या में वारिसलीगंज विधानसभा क्षेत्र के किसान, मजदूर, विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओ, पंचायत प्रतिनिधिओ तथा बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। बैठक में मुख्य रूप से 30 वर्षों से बंद चीनी मिल बचाने को लेकर आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अखिलेश्वर कुमार सिंह तथा संचालन भाजपा नेता शैलेंद्र कुमार शर्मा ने किया। बैठक में काशीचक के पूर्व जिला पार्षद सह वारिसलीगंज विधायक अरूणा देवी के पति अखिलेश सिंह, जिला पार्षद अंजनी कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण सिंह, लोजपा नेता सियाराम सिंह, पूर्व मुखिया राजेंद्र प्रसाद, पैक्स अध्यक्ष शीतल प्रसाद, अपसढ़ मुखिया राजकुमार सिंह, शाहपुर मुखिया कुमारी रंजना, मोहिद्दीनपुर मुखिया प्रभु प्रसाद, चकवाय पंचायत के मुखिया मृत्युंजय प्रसाद, सौर मुखिया प्रतिनिधि दिलीप रावत, पूर्व मुखिया रामरतन सिंह, पूर्व वार्ड पार्षद संजय कुमार, भाजपा नगर अध्यक्ष संजय कुमार मंगल, श्रीकांत प्रसाद बम बम, विधायक प्रतिनिधि राम सकल सिंह, काशीचक के मुकेश कुमार, अरुण सिंह, चंद्रमौली शर्मा, मुखिया शंकर प्रसाद, मंजौर मुखिया प्रतिनिधि आनंदी प्रसाद, अजीत यादव तथा अशोक पासवान समेत दर्जनों जनप्रतिनिधियों ने किसान हितों की बात करते हुए चीनी मिल को बचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर पूर्व जिला पार्षद अखिलेश सिंह ने कहा कि बंद पड़ी वारिसलीगंज की चीनी मिल एक सामाजिक मुद्दा है, जो गरीब मजदूर और किसानों के पेट से जुड़ा है, इसे हर हाल में सुरक्षित रखना तथा बंद पड़े चीनी मिल की जगह पुनः अत्याधुनिक मिल स्थापित करवा चालू करवाना हम तमाम लोगों की जवाबदेही बनती है। इसके लिए इसे राजनीतिक मुद्दा से ऊपर उठकर आंदोलन के मध्यम से सरकार के पास अपनी बात को पुर जोर तरीके से रखने की जरूरत है। परिवर्तन के लिए आंदोलन ही एक विकल्प बन जाता है। वक्ताओं ने अपनी अपनी बात रखी, जिसमें मजदूर-किसान कमिटी के बैनर तले वारिसलीगंज की चीनी मिल के मशीनों को तबतक यहां से जाने नहीं देने का निर्णय गया, जबतक सरकार किसान मज़दूरों के लाभ से जुड़े किसी उद्योग लगाने की बात नहीं करती है। अगर चीनी मिल को फिर से अत्याधुनिक बनाकर चालू किया जाए या किसान से जुड़े अन्य उधोग स्थापित किया जायेगा तो बड़े पैमाने पर रोजगार की समस्या भी दूर होगी। आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए कहा गया की जिला स्तरीय बैठक कर बड़ी संख्या में लोग स्थानीय डाक बांगला से पैदल जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय का घेराव करने को वध्य होंगे। वहीं जिला स्तर से समस्या का समाधान नहीं होने की स्थिति में विधानसभा का घेराव करने का भी निर्णय लिया गया। इस कार्य को लेकर गांव-गांव में पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क कर हस्ताक्षर अभियान चलाने, धन संग्रह करने के साथ कार्यक्रम की सारी जानकारी से डीएम को अवगत करवाने का निर्णय लिया गया। सर्व सम्मति से प्रस्ताव लिया गया कि चीनी मिल की परिसंपत्ति को बाहर जाने नहीं दिया जाना है, जबतक मांगे पूरी नही हो जाती है, इसको लेकर के मुख्यमंत्री, डीएम तथा सांसद को लिखित सूचना देकर किसानों के हित में मिल को पुनर्स्थापित करने की मांग करने का निर्णय लिया गया है। गौरतलब है वारिसलीगंज की बंद पड़ी चीनी मिल जो पिछले करीब 30 वर्षों से बंद है, हाल के दिनों में सरकार द्वारा चीनी मिल की जमीन को बियाड़ा के हाथों सौंप दी गई है, जिसके तहत घेराबंदी का कार्य किया जा रहा है। वहीं मिल की परिसंपत्तियों को मशीन से काटकर स्क्रेपर बना उसे भी नीलाम करने की प्रक्रिया में वियाडा जुटीं है। इस प्रक्रिया की जानकारी मिलते हैं क्षेत्र के किसान, मजदूर एवं जनप्रतिनिधियों ने सरकार से किसान मजदूरों के हित वाला उद्योग लगाने की मांग को लेकर आंदोलन की रूप रेखा तैयार करने में लोग जुट गए है।

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