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शनिवार, 29 अक्टूबर 2022

जीवनदायिनी सकरी नदी के आस पास है धार्मिक स्थल, झारखंड से निकलकर नवादा होते हुए नालंदा टाल तक बहती है यह नदी

जीवनदायिनी सकरी नदी के आस पास है धार्मिक स्थल, झारखंड से निकलकर नवादा होते हुए नालंदा टाल तक बहती है यह नदी
- आलेख- रत्नाकर नवादा। नदी, मानव जीवन और सभ्यता का उद्गम स्थल है। जमाने से एक कहावत प्रचलित है- कौन नदी, कौन गांव, केकर बेटा, की नाम अर्थात नदी के नाम से गांव की पहचान होती थी। सनातन मतवादी नदी वंदना करते हैं और अपनत्व के कारण मां का दर्जा देते हैं। नदी छोटी हो या बड़ी, सबका अपना इतिहास और भूगोल है। झारखंड राज्य के हजारीबाग और गिरिडीह पर्वतमाला से दो अलग-अलग नाले से प्रवाहित जल, गिरिडीह जिले के घोड़सिमर नामक स्थल तक तेज धारा वाले जल श्रोत का सकरी नदी के रूप में पहचान है। सकरी नदी सतगामा के पास (झारखंड) पूरब से पश्चिम प्रवाहित है। इसके उपर पेट्रो नामक झरना है। झरने के पास एक प्राचीन शिव मंदिर को नए रूप में बनाया गया है। आगे नदी दस किलोमीटर के सफर के बाद बासोडीह और मरचोय गांव के बीच के दक्षिण से उतर दिशा में प्रवाहित है। मिरचोय गांव के बीच से दक्षिण से उतर दिशा में प्रवाहित है। मरचोय और बासोडीह गांव के बीच में एक छोटे पर्वत पर शिवलिंग हैं जो प्राचीन है, लेकिन अब नया मन्दिर बना दिया गया है। शिव विवाह के मौके पर दो दिनों का मेला लगता है। इस स्थान के पास सकरी नदी में फागुन महीने तक जल रहता है। इस शिवलिंग के आगे नौशरवानाथ शिवलिंग है। सभी शिवलिंग सकरी नदी के किनारे है, इसके दो किलोमीटर उत्तर में बालीमहादेव नामक शिव मंदिर है, यह मंदिर शिवपुर गांव के पास है। सकरी नदी के एक किनारे में पर्वत है और दूसरे किनारे में गांव है। पेट्रो झरना के आगे आधा दर्जन शिव मंदिर हैं। बीस कलोमीटर उत्तर और नवादा जिले के गोविन्दपुर कस्बा से पांच किलोमीटर दक्षिण में धरती से 30 फीट ऊंचा एक गढ़ पर विशाल शिवलिंग एक पत्थर से निर्मित मंदिर में स्थापित है। शिवमंदिर 22 फीट ऊंचा है और पत्थर पर पत्थर रखकर चू�

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